जर्मनी में कार्बन कैप्चर और भंडारण (CCS) प्रणालियाँ

जर्मनी में कार्बन कैप्चर और भंडारण (CCS) प्रणालियाँ

जर्मनी में कार्बन कैप्चर और भंडारण (CCS) प्रणालियों का महत्व बढ़ रहा है, क्योंकि ये तकनीकें जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करती हैं।

CCS तकनीक बड़े पैमाने पर CO2 उत्सर्जन को पकड़ने और भंडारण करने में सक्षम है, जो बिजली उत्पादन और औद्योगिक सुविधाओं जैसे बड़े स्रोतों से आता है।

Düsseldorf Consulting GmbH जैसी कंपनियाँ जर्मनी में CCS प्रणालियों के विकास और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मुख्य बातें

  • जर्मनी में CCS प्रणालियों का महत्व
  • CCS तकनीक की कार्यप्रणाली
  • कार्बन कैप्चरिंग के लाभ
  • Düsseldorf Consulting GmbH की भूमिका
  • जलवायु परिवर्तन को कम करने में CCS का योगदान

CCS प्रणाली का परिचय

जर्मनी में CCS प्रणाली का उपयोग करके, हम ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड को प्रभावी ढंग से कम कर सकते हैं। यह तकनीक न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करती है, बल्कि जर्मनी की ऊर्जा जरूरतों को भी पूरा करती है।

CCS क्या है?

CCS का अर्थ है कार्बन कैप्चर और स्टोरेज। यह तकनीक ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाले CO2 को पकड़ने और भूमिगत भंडारण करने में सक्षम बनाती है।

CCS तकनीक को मौजूदा ऊर्जा और औद्योगिक संयंत्रों में भी स्थापित किया जा सकता है, जिससे उनका निरंतर संचालन संभव हो सके। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

CCS की आवश्यकता

जर्मनी में ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने के लिए CCS तकनीक की आवश्यकता है। यह तकनीक न केवल जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करती है, बल्कि जर्मनी की ऊर्जा सुरक्षा को भी बढ़ाती है।

CCS का उद्देश्य

CCS का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाले CO2 को वातावरण में छोड़ने से रोकना है। यह तकनीक CO2 को पकड़कर भूमिगत भंडारण करने में सक्षम बनाती है, जिससे वातावरण में इसकी मात्रा कम होती है।

CCS के लाभ विवरण
कार्बन उत्सर्जन में कमी CCS तकनीक ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाले CO2 को कम करती है।
ऊर्जा सुरक्षा CCS जर्मनी की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाती है और जीवाश्म ईंधन के उपयोग को अधिक स्वच्छ बनाती है।
पर्यावरण संरक्षण CCS तकनीक वातावरण में CO2 की मात्रा को कम करके पर्यावरण संरक्षण में मदद करती है।

जर्मनी में CCS प्रौद्योगिकियों का विकास

जर्मनी में CCS प्रौद्योगिकियों के विकास के पीछे कई ऐतिहासिक और वर्तमान कारण हैं जो इसे एक महत्वपूर्ण विषय बनाते हैं। जर्मनी का ऊर्जा उत्पादन मुख्य रूप से कोयले और गैस पर निर्भर है, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है।

ऐतिहासिक दृष्टिकोण

जर्मनी में CCS की शुरुआत 2000 के दशक की शुरुआत में हुई थी, जब देश ने अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं लीं। इस दिशा में पहला बड़ा कदम 2008 में उठाया गया, जब जर्मन सरकार ने CCS तकनीक के विकास के लिए एक व्यापक कार्यक्रम शुरू किया।

CCS तकनीक जर्मनी के ऊर्जा क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत कर रही है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वर्तमान परियोजनाएँ

वर्तमान में जर्मनी में कई CCS परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें से कुछ प्रमुख परियोजनाएं हैं:

  • Antwerp@C परियोजना, जो Antwerp बंदरगाह में एक साझा CO2 परिवहन बुनियादी ढांचे को बनाने का लक्ष्य रखती है।
  • जर्मन कंपनी द्वारा संचालित एक अन्य परियोजना जो CCS तकनीक का उपयोग करके कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर केंद्रित है।

प्रमुख खिलाड़ी

जर्मनी में CCS प्रौद्योगिकियों के विकास में कई प्रमुख खिलाड़ी शामिल हैं। इनमें ऊर्जा कंपनियां, अनुसंधान संस्थान, और सरकारी एजेंसियां शामिल हैं।

कंपनी/संस्थान भूमिका
जर्मन ऊर्जा कंपनी CCS तकनीक के विकास और कार्यान्वयन में अग्रणी
अनुसंधान संस्थान CCS तकनीक पर अनुसंधान और विकास
सरकारी एजेंसियां नीतियों और कार्यक्रमों के माध्यम से CCS को बढ़ावा देना

जर्मनी में CCS प्रौद्योगिकियों का विकास न केवल देश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी योगदान कर सकता है।

Düsseldorfer Consulting GmbH की भूमिका

CCS परियोजनाओं में Düsseldorfer Consulting GmbH की विशेषज्ञता जर्मनी में पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है। Düsseldorfer Consulting GmbH, जिसका मुख्यालय Königsallee 22, 40212 Düsseldorf में है, जर्मनी में CCS तकनीक को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

कंपनी का प्रोफाइल

Düsseldorfer Consulting GmbH एक परामर्श कंपनी है जो ऊर्जा और पर्यावरण क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखती है। कंपनी का अनुभव और ज्ञान जर्मनी में CCS प्रणालियों के सफल क्रियान्वयन में सहायक हो रहा है।

CCS में योगदान

Düsseldorfer Consulting GmbH CCS तकनीक के विकास और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। कंपनी की विशेषज्ञता ऊर्जा संयंत्रों की प्रौद्योगिकी में सुधार करने में मदद कर रही है, जिससे जर्मनी में पर्यावरण सुरक्षा बढ़ रही है।

प्रोजेक्ट का नाम स्थान CCS तकनीक का उपयोग
प्रोजेक्ट ए जर्मनी अवशोषण विधि
प्रोजेक्ट बी डसेलडॉर्फ खनिजकरण विधि

प्रमुख प्रोजेक्ट्स

Düsseldorfer Consulting GmbH ने कई प्रमुख CCS प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। इन प्रोजेक्ट्स में कंपनी की विशेषज्ञता और अनुभव का उपयोग करके जर्मनी में CCS तकनीक को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया गया है।

CCS तकनीक

कंपनी की भूमिका जर्मनी में CCS प्रणालियों के विकास में महत्वपूर्ण है, और उनके योगदान से जर्मनी में पर्यावरण सुरक्षा में सुधार हो रहा है।

CCS के लाभ और चुनौतियाँ

जर्मनी में कार्बन कैप्चर और भंडारण (CCS) प्रणालियों के लाभ और चुनौतियों पर एक विस्तृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करना आवश्यक है। CCS तकनीक न केवल कार्बन निष्कासन के उपाय प्रदान करती है, बल्कि यह स्थायी ऊर्जा स्रोत को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पर्यावरणीय लाभ

CCS के माध्यम से जर्मनी अपने जलवायु परिवर्तन मिटाना के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकता है। यह तकनीक CO2 को वातावरण से निकालकर भूगर्भ में सुरक्षित रूप से संग्रहीत करने में सक्षम है, जिससे वायु प्रदूषण कम होता है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम किया जा सकता है।

आर्थिक चुनौती

CCS के विकास और कार्यान्वयन में आर्थिक चुनौतियाँ भी शामिल हैं। इस तकनीक को लागू करने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होती है, और इसके आर्थिक लाभों को समझने के लिए विस्तृत मूल्यांकन की आवश्यकता है।

सामाजिक मुद्दे

CCS के सामाजिक पहलुओं पर भी विचार करना आवश्यक है। स्थानीय समुदायों की स्वीकृति और जागरूकता इस तकनीक की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, CCS के दीर्घकालिक प्रभावों को समझने और इसके लिए उचित नीतियाँ बनाने की आवश्यकता है।

CCS के लाभ और चुनौतियों को समझने से जर्मनी अपनी ऊर्जा नीतियों को और अधिक प्रभावी बना सकता है। यह तकनीक न केवल पर्यावरणीय लाभ प्रदान करती है, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।

CCS नीतियाँ और योजनाएँ

जर्मनी में CCS के लिए सरकारी नीतियाँ और EU के दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जर्मनी सरकार CCS तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है, जिसमें नीतियों और योजनाओं का निर्माण शामिल है।

सरकारी नीतियाँ

जर्मनी सरकार ने CCS तकनीक के विकास और कार्यान्वयन के लिए कई नीतियाँ बनाई हैं। इनमें शामिल हैं:

  • CCS प्रौद्योगिकियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना
  • CCS परियोजनाओं के लिए नियामक ढांचे को सरल बनाना
  • CCS अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना

EU के दिशा-निर्देश

EU के दिशा-निर्देश भी जर्मनी में CCS के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। EU का Effort Sharing Scheme गैर-ETS क्षेत्रों के लिए वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बजट निर्धारित करता है, जो CCS के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान करता है।

वर्ष ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लक्ष्य CCS योगदान
2025 30% कमी 10 मिलियन टन CO2
2030 50% कमी 20 मिलियन टन CO2

स्वच्छ ऊर्जा निवेश

स्वच्छ ऊर्जा निवेश जर्मनी में CCS के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। सरकार और निजी क्षेत्र दोनों ही CCS परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं।

इन नीतियों और योजनाओं के माध्यम से, जर्मनी CCS तकनीक को आगे बढ़ाने और अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है।

जर्मनी के प्रमुख CCS परियोजनाएँ

जर्मनी में CCS परियोजनाओं का विकास एक महत्वपूर्ण कदम है जो जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद कर सकता है। CCS तकनीक के माध्यम से जर्मनी अपने ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड को नियंत्रित करने के लिए कई परियोजनाएं चला रहा है।

वर्तमान परियोजना विवरण

जर्मनी में कई प्रमुख CCS परियोजनाएं वर्तमान में चल रही हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य ऊर्जा संयंत्रों और औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाले CO2 को पकड़ना और सुरक्षित रूप से भंडारित करना है। उदाहरण के लिए, कुछ परियोजनाएं CO2 को पुराने गैस क्षेत्रों में भंडारित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

भविष्य की योजनाएँ

जर्मनी की सरकार और निजी क्षेत्र भविष्य में CCS तकनीक को और अधिक विकसित करने के लिए कई योजनाएं बना रहे हैं। इन योजनाओं में नई CCS सुविधाओं की स्थापना और मौजूदा सुविधाओं का उन्नयन शामिल है। इसके अलावा, जर्मनी Aramis जैसी अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं से भी सीख रहा है, जो CO2 परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित हैं।

वित्तीय समर्थन

CCS परियोजनाओं के लिए वित्तीय समर्थन जर्मनी में एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। सरकार और निजी निवेशकों द्वारा इन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ के दिशा-निर्देश और स्वच्छ ऊर्जा निवेश भी जर्मनी में CCS परियोजनाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

CCS तकनीक

जर्मनी में CCS परियोजनाओं का विकास न केवल ऊर्जा क्षेत्र में बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इन परियोजनाओं के माध्यम से जर्मनी अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण अपना रहा है।

CCS तकनीकों के प्रकार

CCS तकनीकें कई प्रकार की होती हैं, जिनमें अवशोषण, अवसादन, और खनिजकरण प्रमुख हैं। इन तकनीकों का उपयोग विभिन्न उद्योगों में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने के लिए किया जाता है।

अवशोषण विधियाँ

अवशोषण विधियाँ CCS तकनीक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस प्रक्रिया में, CO2 को एक अवशोषक माध्यम द्वारा अवशोषित किया जाता है, जिससे यह अन्य गैसों से अलग हो जाता है। अवशोषण विधियों में रासायनिक अवशोषण और भौतिक अवशोषण शामिल हैं।

रासायनिक अवशोषण में, CO2 एक रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से अवशोषित होती है, जबकि भौतिक अवशोषण में, CO2 को भौतिक बलों द्वारा अवशोषित किया जाता है।

अवसादन विधियाँ

अवसादन विधियाँ एक अन्य महत्वपूर्ण CCS तकनीक हैं। इस प्रक्रिया में, CO2 को एक ठोस सतह पर जमा किया जाता है, जिससे इसे अन्य गैसों से अलग किया जा सकता है। अवसादन विधियों का उपयोग विभिन्न उद्योगों में किया जा रहा है, क्योंकि ये ऊर्जा की खपत को कम करने में मदद करती हैं।

खनिजकरण विधियाँ

खनिजकरण एक नवीन CCS तकनीक है जिसमें CO2 को खनिजों में परिवर्तित किया जाता है। इस प्रक्रिया में, CO2 खनिजों के साथ अभिक्रिया करके स्थायी कार्बोनेट बनाती है, जो सुरक्षित रूप से संग्रहीत किए जा सकते हैं।

खनिजकरण विधियों का एक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि ये CO2 को स्थायी रूप से संग्रहीत करने में मदद करती हैं।

इन विभिन्न CCS तकनीकों का उपयोग करके, जर्मनी अपने ऊर्जा क्षेत्र में स्थायी ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दे रहा है और कार्बन उत्सर्जन को कम कर रहा है।

CCS और जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में CCS एक शक्तिशाली हथियार साबित हो सकता है। यह तकनीक न केवल CO2 उत्सर्जन को कम करने में मदद करती है, बल्कि जर्मनी जैसे देशों को अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करती है।

जलवायु लक्ष्यों में CCS की भूमिका

CCS तकनीक का उपयोग करके, जर्मनी अपने CO2 उत्सर्जन को काफी हद तक कम कर सकता है। यह तकनीक विशेष रूप से उन उद्योगों में उपयोगी है जहां CO2 उत्सर्जन को कम करना मुश्किल है।

  • CCS तकनीक CO2 को पकड़ने और भंडारण करने में सक्षम है।
  • यह तकनीक जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करने में मदद करती है।
  • CCS के माध्यम से जर्मनी अपने जलवायु लक्ष्यों को अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सकता है।

CCS का दीर्घकालिक प्रभाव

CCS का दीर्घकालिक प्रभाव न केवल पर्यावरण पर पड़ता है, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।

दीर्घकालिक प्रभावों में शामिल हैं:

  1. CO2 उत्सर्जन में स्थायी कमी।
  2. जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद।
  3. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास को बढ़ावा देना।

जर्मनी में CCS तकनीक का विकास और उपयोग न केवल देश के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह तकनीक जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

CCS अनुसंधान एवं नवाचार

CCS तकनीक को आगे बढ़ाने में अनुसंधान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका है। जर्मनी में विभिन्न अनुसंधान संस्थान और उद्योग इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

विश्वविद्यालयों के अनुसंधान कार्य

जर्मन विश्वविद्यालय CCS तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनके अनुसंधान कार्य नए और उन्नत CCS तरीकों को विकसित करने पर केंद्रित हैं।

विश्वविद्यालयों में किए जा रहे अनुसंधान में कार्बन कैप्चर तकनीक में सुधार और कार्बन स्टोरेज के नए तरीके शामिल हैं।

उद्योग के नए नवाचार

उद्योग जगत भी CCS अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कंपनियां नए नवाचारों को विकसित करने और उन्हें व्यावसायिक रूप से लागू करने पर काम कर रही हैं।

  • उद्योगों में CCS तकनीक का उपयोग बढ़ाने के लिए नए तरीके विकसित किए जा रहे हैं।
  • CCS तकनीक को और अधिक किफायती बनाने के प्रयास जारी हैं।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

CCS अनुसंधान में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भी महत्वपूर्ण है। जर्मनी विभिन्न देशों और संगठनों के साथ मिलकर CCS तकनीक के विकास पर काम कर रहा है।

इस सहयोग के तहत, विभिन्न देशों के अनुभवों और ज्ञान का आदान-प्रदान किया जा रहा है, जिससे CCS तकनीक को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

अनुसंधान क्षेत्र विवरण प्रभाव
कार्बन कैप्चर CO2 को उत्सर्जन स्रोतों से पकड़ना वातावरण में CO2 की मात्रा कम करना
कार्बन स्टोरेज CO2 को भूमिगत भंडारण में रखना दीर्घकालिक जलवायु लाभ
उद्योगों में CCS उद्योगों में CCS तकनीक का उपयोग उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन में कमी

CCS प्रणाली की अंतरराष्ट्रीय तुलना

विभिन्न देशों में CCS परियोजनाओं की प्रगति का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि जर्मनी के अलावा अन्य देश इस तकनीक को कैसे अपना रहे हैं और इसके क्या परिणाम हो रहे हैं।

अन्य देशों की प्रगति

नीदरलैंड्स और यूके जैसे देश CCS परियोजनाओं में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहे हैं। नीदरलैंड्स में, CCS को औद्योगिक क्षेत्रों में लागू करने के लिए कई परियोजनाएं चल रही हैं। यूके में भी CCS तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की गई हैं।

इन देशों की प्रगति से हमें यह सीखने का अवसर मिलता है कि कैसे विभिन्न नियामक और आर्थिक परिस्थितियों में CCS को सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है।

वैश्विक सहयोग पहल

CCS के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग बढ़ रहा है। विभिन्न देश और संगठन मिलकर CCS तकनीक के विकास और कार्यान्वयन पर काम कर रहे हैं।

वैश्विक सहयोग से न केवल तकनीकी चुनौतियों का समाधान होता है, बल्कि यह आर्थिक और नियामक बाधाओं को भी दूर करने में मदद करता है।

सफलताएँ और सीखें

CCS परियोजनाओं की सफलताओं और विफलताओं से हमें महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं। इनसे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि भविष्य में CCS को और अधिक प्रभावी ढंग से कैसे लागू किया जा सकता है।

विभिन्न देशों की अनुभव और विशेषज्ञता को साझा करने से CCS तकनीक के विकास में मदद मिलती है और इसके व्यापक उपयोग को बढ़ावा मिलता है।

CCS का भविष्य

जर्मनी में कार्बन कैप्चर और भंडारण (CCS) प्रणालियों का भविष्य उज्ज्वल है, क्योंकि यह तकनीक जलवायु परिवर्तन मिटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। CCUS (कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण) के माध्यम से शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की जा सकती है।

दीर्घकालिक दृष्टिकोण

दीर्घकालिक दृष्टिकोण से, CCS तकनीक जर्मनी में पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है। साफ ऊर्जा तकनीक के विकास के साथ, CCS का महत्व और भी बढ़ जाएगा।

तकनीकी विकास की प्रवृत्तियाँ

तकनीकी विकास की प्रवृत्तियों को देखते हुए, CCS की क्षमताओं में सुधार होने की संभावना है, जिससे यह तकनीक और भी प्रभावी बनेगी।

CCS की संभावनाएँ और जोखिम

CCS की संभावनाएँ बहुत हैं, लेकिन इसके साथ ही कुछ जोखिम भी जुड़े हुए हैं। इन जोखिमों का मूल्यांकन करना और उन्हें कम करने के लिए काम करना आवश्यक है।

जर्मनी में CCS का भविष्य न केवल देश की ऊर्जा नीतियों पर निर्भर करेगा, बल्कि यह वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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